केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लिए नई जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्तों को हटाने की तैयारी कर रही है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बड़ा संशोधन की तैयारी
केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लिए नई जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्तों को हटाने की तैयारी कर रही है। इस बदलाव से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या तत्काल बढ़ जाएगी। सरकार का मानना है कि महिला आरक्षण को साल 2034 की लंबी समय-सीमा के बजाय आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों से ही प्रभावी कर दिया जाना चाहिए। इससे लेकर एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक अप्रैल के पहले सप्ताह में संसद पटल पर रखे जाने की संभावना है। अधिनियम के लागू होते ही मध्य प्रदेश का राजनीतिक मानचित्र पूरी तरह बदल जाएगा। लोकसभा की 29 सीटें बढ़कर 43 और 230 विधानसभा सीटें बढ़कर 345 हो जाएंगी।
इससे पहले इस कानून को साल 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जाना था। किंतु अब केंद्र सरकार इसे मौजूदा बाधाओं से मुक्त कर समय से पहले धरातल पर उतारने जा रही है। संशोधन बिल के पारित होने के बाद न केवल महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित होगी, बल्कि सरकार बनाने के समीकरण, सीटों के गणित और कैबिनेट के विस्तार तक की पूरी प्रक्रिया एक नए ढांचे में ढल जाएगी।
सीधे 50 फीसदी बढ़ोत्तरी
अहम बात यह है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है। इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50 फीसदी का इजाफा हो जाएगा। इसके साथ ही संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी।
एससी-एसटी को अलग आरक्षण
महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन 33 प्रतिशत आरक्षित सीटों के भीतर एससी-एसटी आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा। संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
इस तरह तय होंगी आरक्षित सीट
कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसे लेकर दो संभावनाएं जताई जा रही हैं। पहली- नगरीय निकायों और पंचायतों की तरह लॉटरी निकालकर सीटों का आरक्षण तय किया जा सकता है। दूसरी- जिन सीटों पर महिला मतदाताओं का अनुपात अधिक हो, उन्हें आरक्षित किया जा सकता है। हालांकि, लॉटरी सिस्टम की संभावना अधिक है। क्योंकि अधिकांश सीटों पर महिला-पुरुष वोटर का अनुपात लगभग बराबर होता है।
बदल जाएगा सियासी गणित
इस संशोधन का असर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों पर पड़ेगा। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक सीटों का गणित बदल जाएगा। साथ ही विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
लोकसभा की 43 सीटें होंगी
मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं, जिनमें 6 महिला सांसद हैं। इन 29 सीटों में 20 अनारक्षित, 4 एससी और 5 एसटी के लिए आरक्षित हैं। महिला आरक्षण बिल में संशोधन के बाद सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी यानी मप्र में लोकसभा की कुल 43 सीटें होंगी।
मध्यप्रदेश का दिखेगा दबदबा
33 फीसदी के हिसाब से 43 में से 15 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस बदलाव से केंद्र सरकार में मध्य प्रदेश की भागीदारी और राजनीतिक वजन दोनों बढ़ेगा। अधिक सांसद होने का अर्थ है कि राज्य अपनी मांगों और मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर और मजबूती से रख पाएगा।
मध्यप्रदेश: महिला सांसदों की संख्या बढ़ी
2024 में निर्वाचित सभी छह महिला सांसद भाजपा से हैं। इनमें अनिता नागर सिंह चौहान रतलाम, हिमाद्री सिंह शहडोल, संध्या राय भिंड, लता वानखेड़े सागर, भारती पारधी बालाघाट शामिल हैं। कुल मिलाकर, 2003 के बाद से मध्यप्रदेश में महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, जो 2004 में मात्र 2 से बढ़कर 2024 में 6 तक पहुंच गया है।
पांच लोस चुनाव में महिला सांसद
सुमित्रा महाजन ने बनाया रिकॉर्ड
मध्यप्रदेश में वर्ष 1951 से अब तक 33 महिला सांसद चुनी गईं। इसमें सर्वाधिक बार लोकसभा चुनाव में विजयी होने का रिकॉर्ड सुमित्रा महाजन का आठ बार का है। वहीं, विजयाराजे सिंधिया 7 बार विजयी रही हैं, मिनिमाता अगमदास गुरु 5 बार और सहोदरा बाई 4 बार विजयी रही हैं।
विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा बदलेगा
मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें बहुमत का आंकड़ा 116 है। वर्तमान में 27 महिला विधायक हैं। संशोधन के बाद 50 फीसदी बढ़कर 345 हो जाएंगी। वहीं 33 फीसदी आरक्षण के हिसाब से देखे तो 345 में से 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। मौजूदा महिला विधायकों की संख्या से चार गुना ज्यादा है। सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा भी बदल जाएगा। किसी भी दल को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए 345 में से कम से कम 174 सीटें जीतनी होंगी।
52 मंत्रियों का होगा कैबिनेट
विधायकों की संख्या बढ़ने का सीधा असर मंत्रिमंडल के आकार पर भी पड़ेगा। नियमानुसार, कुल विधायकों की संख्या के 15 प्रतिशत को मंत्री बनाया जा सकता है। इस हिसाब से मध्य प्रदेश में मंत्रियों की अधिकतम संख्या इस समय 34 है जो बढ़कर 52 हो जाएगी।
मध्यप्रदेश:अब तक 269 महिलाएं पहुंची विधानसभा
मध्यप्रदेश में 1957 से लेकर साल 2023 तक कुल 1 हजार 658 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। जबकि 269 महिला प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंची। 2023 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 सीटों में से 27 महिलाएं जीतीं, जो सदन का लगभग 12 फीसदी है। भाजपा से 21 और कांग्रेस से 6 महिला उम्मीदवार विजयी हुईं।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
मध्यप्रदेश में मंत्री, पूर्व मंत्री से लेकर विधायक-सांसद और अन्य पार्टी पदाधिकारियों द्वारा अनुशासन, भाषा की गरिमा तोड़ने के लगातार सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं के बिगड़े बोल और अधिकारियों को खुलेआम दी जा रही धमकियों ने पार्टी-संगठन की जमकर किरकिरी करा रहे हैं। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने करैरा के एसडीओपी (प्रशिक्षु आईपीएस) आयुष जाखड़ को खुलेआम धमकी दी।
मध्य प्रदेश की राजनीति में कुछ चेहरे अपनी विरासत से पहचाने जाते हैं, तो कुछ अपनी कार्यशैली से। लेकिन जब बात अजय सिंह 'राहुल' की आती है, तो ये दोनों खूबियां एक जादुई संतुलन में नजर आती हैं। विशेष बातचीत...
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति अब केवल जुमला बनकर रह गई है। विधानसभा के पटल पर रखे गए ताजा आंकड़े प्रदेश की प्रशासनिक ईमानदारी का वह काला चेहरा उजागर करते हैं, जो न केवल चुभने वाला है, बल्कि डरावना भी है। पढ़िए ‘स्टार समाचार’ की विशेष रिपोर्ट...।
कभी बागी और बंदूकों के लिए कुख्यात चंबल का बीहड़ आज एक नए और अधिक खूंखार 'रेत माफिया' की गिरफ्त में है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की कोख उजाड़कर फल-फूल रहा यह अवैध धंधा अब महज चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित खूनी खेल बन चुका है।
साक्षात्कार ... राजनीति अक्सर उन रास्तों से होकर गुजरती है जिसकी कल्पना व्यक्ति ने स्वयं नहीं की होती। कुछ ऐसा ही सफर पृथ्वीपुर विधायक नितेंद्र सिंह राठौर का रहा।
हर रविवार सियासी, नौकरीशाह की अंदर की खबरों का कॉलम
प्रशानिक, राजनीतिक अंदर खबर की खबर उजागर करने वाला कॉलम
बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव से लेकर दिल्ली और फिर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत मध्यप्रदेश विधानसभा में 10 वर्ष तक प्रमुख सचिव रहे अवधेश प्रताप सिंह की जीवन यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है।
मध्यप्रदेश में 2023 में 230 निर्वाचित विधायकों में से 90 के खिलाफ आपराधिक केस चल रहे हैं। इसमें 34 विधायक गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं, जो 230 सदस्यीय सदन का लगभग 39 प्रतिशत है
मध्यप्रदेश में जाति प्रमाण-पत्र का विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गरमाया हुआ है, जिसमें कई वर्तमान-पूर्व सांसद, विधायक और आईएएस-आईपीएस अफसर कानूनी शिकंजे में फंसे नजर आ रहे हैं।