विधानसभा के बजट सत्र का नौवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी के कोल ब्लॉक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं। प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है।
By: Arvind Mishra
Feb 26, 20261:14 PM
भोपाल। स्टार समाचार वेब
विधानसभा के बजट सत्र का नौवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी के कोल ब्लॉक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं। प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजा राशि बाहरी लोगों को भी दी गई है। उन्होंने सदन में कहा कि थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15,94,990 रुपए और यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के नाम पर 14,42,482 रुपए मुआवजा दिया गया। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले की विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग की। ऐसे में कांग्रेस विधायक कांग्रेस विधायक जांच के लिए विधानसभा समिति गठित करने की मांग पर अड़े रहे। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के आश्वासन के बावजूद कांग्रेस विधायक संतुष्ट नहीं हुए और विरोध जारी रखा। अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने सदन की भावना को ध्यान में रखते हुए जांच की बात भी कही है। चूंकि मामला जनता से जुड़ा है, इसलिए आगे की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जानी चाहिए। इसके बाद कांग्रेस के विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया। इस बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई।
आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा
भंवर सिंह शेखावत ने मंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब खुद मंत्री मान रही हैं कि पेड़ उखाड़े जा रहे हैं और मिट्टी निकाली जा रही है, तो फिर सरकार जांच से क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि यही तो विपक्ष कह रहा है कि जमीन पर गतिविधियां जारी हैं। सिंगरौली की प्रभारी मंत्री उइके ने कहा कि वह स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं और आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि प्रभावितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि पेड़ काटे जा रहे हैं और लकड़ी छत्तीसगढ़ भेजी जा रही है। स्थानीय लोगों को हटाया जा रहा है। विपक्ष ने मांग की कि इस मामले की जांच के लिए मंत्री प्रह्लाद पटेल की अध्यक्षता में जेपीसी बनाई जाए, जिसमें दोनों पक्षों के सदस्य शामिल हों।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सवाल
कितने गांव थे
कितनों का विस्थापन हो गया
कितनों का नहीं हुआ
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का जवाब
8 गांव में से 5 गांव की जमीन का अधिग्रहण किया गया
नेता प्रतिपक्ष
8 गांव आते हैं
3 गांव का अधिग्रहण नहीं किया गया
तो फिर कोल विभाग कैसे दे दिया गया
अधिग्रहण किए बगैर कैसे दे दिया है
मंत्री
3.68 अरब से अधिक की राशि से बसाएंगे लोगों को
हर आदिवासी को कम से कम 50 लाख रुपए मिलेंगे
नेता प्रतिपक्ष
12 हजार 98 परिवार हैं
इस हिसाब से 2 लाख प्रति परिवार ही मिलेंगे
50 लाख कैसे मिलेंगे
मंत्री
भूमि का दोगुना मुआवजा दिया गया है
मकान का अलग मुआवजा दिया गया
1552 लोगों को मुआवजा का लाभ मिलेगा
अतिक्रमण करने वालों को लाभ नहीं दिया जाएगा
नेता प्रतिपक्ष
जितेंद्र भदौरिया थाना प्रभारी की पत्नी को 15 लाख की रिश्वत की दी गई
जितेंद्र कुशवाहा यातायात प्रभारी की पत्नी के खाते में 14 लाख दिए गए
ये जानकारी पटल पर रखता हूं
मामले की विधानसभा स्तर पर जांच होना चाहिए
3 गांव का अधिग्रहण नहीं हुआ
पूरा मुआवजा नहीं दिया गया
और कम्पनी को काम कैसे दे दिया गया
अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर
पात्र लोगों को मुआवजा मिलना चाहिए
मुआवजा शीघ्र मिलना चाहिए
कोई उल्लंघन होगा तो मंत्री जांच कराएंगे
नेता प्रतिपक्ष
जब तक जांच नहीं होती काम रुकना चाहिए
आदिवासियों को कब 50-50 लाख मिलेंगे
2 महीने के लिए खदान रुक जाएगी तो कुछ बिगड़ेगा नहीं
विधायक बोले- मालवा में बढ़ रहा नशे का कारोबार
इधर, जावरा से बीजेपी विधायक राजेंद्र पांडे ने कहा कि मालवा क्षेत्र हमेशा शांत रहा है, लेकिन यहां अवैध नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गांजा, अफीम और डोडा चूरा के बाद अब एमडी ड्रग्स भी बनाई जा रही है। नशे की आड़ में अवैध हथियारों की तस्करी भी हो रही है। उन्होंने शासन और प्रशासन से इस पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की।
सदन में सभी याचिकाओं को पढ़ा हुआ माना गया
बीजेपी विधायक राजेंद्र पांडे ने कहा कि 2004 से बैकलॉग लंबित था, जिसे सभापति भंवर सिंह शेखावत ने सभी सदस्यों को साथ लेकर समाप्त करने का कार्य किया है। इसके बाद प्राक्कलन समिति का नवां और दसवां प्रतिवेदन भंवर सिंह शेखावत ने सदन में प्रस्तुत किया। इस समिति के सभापति अजय बिश्नोई हैं। प्रतिवेदन को सदन द्वारा स्वीकार कर लिया गया। सदन में सभी याचिकाओं को पढ़ा हुआ माना गया।
प्रदीप लारिया ने आठवां प्रतिवेदन रखा
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा समाप्त होने के बाद प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की कार्यवाही के अंतर्गत गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों एवं संकल्पों से संबंधित समिति का आठवां प्रतिवेदन समिति के सभापति इंजीनियर प्रदीप लारिया ने प्रस्तुत किया, जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद लोक लेखा समिति के 28वें से लेकर 127वें प्रतिवेदन तक को प्रस्तुत करने की कार्यवाही कांग्रेस विधायक एवं समिति के सभापति भंवर सिंह शेखावत ने पूरी की। इन प्रतिवेदनों को भी सदन द्वारा स्वीकार कर लिया गया।
मिलीभगत के आरोप, शिक्षा मंत्री बोले- दोषी नहीं बचेंगे
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि मंत्री ने स्वीकार किया है कि स्कूलों के रखरखाव के लिए प्रथम चरण में जो राशि जारी होती है, वह कलेक्टर के माध्यम से दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना टेंडर और बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के, भोपाल में लंबे समय से पदस्थ अधिकारी यह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई छोटा-मोटा भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश से जुड़ा मामला है। यदि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड बुलाकर जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है। कई जगह काम नहीं हुआ, लेकिन भुगतान कर दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल भोपाल के ही ठेकेदार काम करते हैं और स्थानीय ठेकेदारों को मौका क्यों नहीं दिया जाता। विधायक घनघोरिया ने मांग की कि जांच शुरू करने से पहले ही संबंधित डिप्टी डायरेक्टर, जॉइंट डायरेक्टर और डायरेक्टर को उनके पद से हटाया जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मैहर की घटना से यह संकेत मिलता है कि अन्य जिलों में भी ऐसी गड़बड़ियां हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।