मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को प्रदेशभर से पहुंचे हजारों आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मप्र विद्युत कर्मचारी संगठन के बैनर तले एकजुट हुए कर्मचारियों ने आंबेडकर मैदान में विशाल धरना दिया।

13 सूत्रीय मांग: आंबेडकर मैदान में धरना और मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांग
चेतावनी: समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को प्रदेशभर से पहुंचे हजारों आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मप्र विद्युत कर्मचारी संगठन के बैनर तले एकजुट हुए कर्मचारियों ने आंबेडकर मैदान में विशाल धरना दिया और अपनी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात का समय मांगा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र बनाया जाएगा।

कर्मचारियों में भारी आक्रोश
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण राजपूत के नेतृत्व में भोपाल पहुंचे कर्मचारियों ने शासन और प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। पदाधिकारियों ने बताया कि इससे पहले कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर अपर मुख्य ऊर्जा सचिव और ऊर्जा मंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि, दोनों ही बैठकों में केवल आश्वासन ही मिले और धरातल पर मांगों का कोई निराकरण नहीं हुआ। लगातार उपेक्षा से आक्रोशित होकर कर्मचारियों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मांगें न मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन
प्रदर्शन स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी जान जोखिम में डालकर दिन-रात सेवाएं देते हैं, लेकिन उन्हें उनका वाजिब हक नहीं मिल रहा है। संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि सीएम जल्द से जल्द संगठन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इन मांगों पर सकारात्मक फैसला लें। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनके हाथ केवल आश्वासन ही लगा, तो वे काम बंद हड़ताल और उग्र आंदोलन की राह चुनने से पीछे नहीं हटेंगे।
कर्मचारियों की 13 सूत्रीय प्रमुख मांगें
संविदा दर्जा व सेवा सुरक्षा: आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी का दर्जा देकर समान सुविधाएं दी जाएं या फिर हरियाणा राज्य की तर्ज पर आउटसोर्स सेवा सुरक्षा नीति लागू की जाए।
नियमितीकरण-बोनस अंक: परीक्षा के माध्यम से नियमितीकरण किया जाए और अनुभव के आधार पर कर्मचारियों को बोनस अंक दिए जाएं।
जोखिम भत्ता: बिजली विभाग में काम के भारी खतरे को देखते हुए जोखिम भत्ता बढ़ाकर 3,000 रुपए किया जाए। कंप्यूटर आपरेटरों को 'उच्च कुशल' श्रेणी में शामिल किया जाए।
दुर्घटना बीमा-अनुकंपा नियुक्ति: विद्युत दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को 50 लाख तथा अन्य परिस्थितियों में कम से कम 20 लाख की बीमा सहायता दी जाए। साथ ही आश्रित को अनुकंपा नौकरी का प्रावधान हो।
वेतन व अन्य भत्ते: 26 दिन के बजाय 30 दिन का पूरा वेतन दिया जाए, लंबित वेतन पुनरीक्षण लागू हो, बोनस 20 प्रतिशत किया जाए और राष्ट्रीय त्योहारों व रात्रिकालीन ड्यूटी का अतिरिक्त पारिश्रमिक मिले।
स्वास्थ्य सुरक्षा व वरिष्ठता: पूरे प्रदेश में शत-प्रतिशत कर्मचारी राज्य बीमा लागू किया जाए, दुर्घटना में घायल होने पर तत्काल आर्थिक मदद दी जाए और अनुभव के आधार पर वरिष्ठता व वेतन वृद्धि दी जाए।


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