देशभर में सरकारी स्कूलों की बदहाली और घटती छात्र संख्या के बीच राज्यों के शिक्षा बजट को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार अपने कुल बजट का औसतन केवल 13.76 फीसदी ही शिक्षा पर खर्च कर रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों ने दावों की खोली पोल
कर्नाटक और झारखंड भी शिक्षा पर कर रहे कम खर्च
राज्य 13-14 प्रतिशत कर रहे खर्च, जो मानक से कम
बिहार 18.78 प्रतिशत के साथ अधिक खर्च वाला राज्य
भोपाल। स्टार समाचार वेब
देशभर में सरकारी स्कूलों की बदहाली और घटती छात्र संख्या के बीच राज्यों के शिक्षा बजट को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार अपने कुल बजट का औसतन केवल 13.76 फीसदी ही शिक्षा पर खर्च कर रही है। यह आंकड़ा यूनेस्को द्वारा निर्धारित 15 से 20 प्रतिशत के वैश्विक मानक से काफी कम है। शिक्षा पर कम खर्च करने वाले राज्यों की राष्ट्रीय सूची में मध्यप्रदेश निचले पायदान पर आ गया है। दरअसल, वर्ष 2018-19 से अब तक के औसत बजट आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई सूची में कर्नाटक (10.96%) सबसे नीचे है। इसके बाद झारखंड (13.03%) और उत्तर प्रदेश (13.41%) का स्थान है। मध्यप्रदेश 13.76% बजट आवंटन के साथ इस सूची में चौथे सबसे निचले पायदान पर है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ (14.95%) और राजस्थान (16.90%) भी शिक्षा आवंटन के मामले में मध्यप्रदेश से बेहतर स्थिति में हैं, जबकि बिहार 18.78% खर्च के साथ शीर्ष पर है।
देशभर में बंद हो रहे सरकारी स्कूल
यूडीआईएसई+ के आंकड़ों के मुताबिक, 2018-19 से 2025-26 के बीच देश में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या 11 लाख से घटकर 10 लाख रह गई है। इस दौरान 1.5 करोड़ छात्रों ने सरकारी स्कूलों को छोड़ दिया। मध्यप्रदेश में भी स्कूलों के विलय (मर्जर) और कम नामांकन के कारण कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बंद हुए हैं।
सरकारी व्यवस्था से उठ रहा भरोसा
हालांकि घटती जन्मदर को भी इसका एक कारण माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ जनसांख्यिकीय बदलाव ही वजह नहीं है। इसी अवधि में निजी स्कूलों में 70 लाख नए बच्चों का प्रवेश होना साबित करता है कि अभिभावकों का सरकारी व्यवस्था से भरोसा उठ रहा है।
खल रहा बुनियादी सुविधाओं का अभाव
मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे की स्थिति चिंताजनक है। चौंकाने वाली बात यह है कि 94.2 फीसदी यानी देश के 63 हजार सरकारी स्कूलों में आज भी शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में भी सरकारी स्कूल पिछड़े हैं।
सस्ती शिक्षा के बाद भी पलायन
सामान्य सरकारी स्कूल में बच्चे की सालाना शिक्षा का खर्च 5,000 रुपए से भी कम आता है, जबकि निजी स्कूलों में यह न्यूनतम 25,000 रुपए सालाना है। इसके बावजूद गुणवत्ता और सुविधाओं के अभाव में अभिभावक निजी स्कूलों को चुन रहे हैं।
| प्रमुख राज्य | औसत शिक्षा बजट खर्च |
| बिहार | 18.78% |
| उत्तराखंड | 17.35% |
| राजस्थान | 16.90% |
| छत्तीसगढ़ | 14.95% |
| मध्य प्रदेश | 13.76% |
| उत्तर प्रदेश | 3.41% |
| झारखंड | 13.03% |
| कर्नाटक | 10.96% |
| जम्मू-कश्मीर | 14.95% |
| पश्चिम बंगाल | 14.86% |
शिक्षकों की कमी बनी चुनौती
रिपोर्ट में मध्य प्रदेश को उन प्रमुख राज्यों में शामिल किया गया है जहां सरकारी स्कूल व्यवस्था में व्यापक सुधार की तत्काल जरूरत है। देशभर में 1.04 लाख से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं और करीब 10 लाख शिक्षक पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं।
केवल भवन या संख्या बढ़ाना काफी नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों से छात्रों का पलायन रोकने के लिए केवल भवन या संख्या बढ़ाना काफी नहीं होगा। राज्य सरकार को शिक्षा का बजट बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचा मजबूत करने, पर्याप्त और प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती करने व स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को सख्त करने पर ध्यान देना होगा।

देशभर में सरकारी स्कूलों की बदहाली और घटती छात्र संख्या के बीच राज्यों के शिक्षा बजट को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार अपने कुल बजट का औसतन केवल 13.76 फीसदी ही शिक्षा पर खर्च कर रही है।
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