मध्यप्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक तैयारी शुरू कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है।

बदले कई नियम...अब जमानत राशि बढ़कर 32 हजार
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक तैयारी शुरू कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है। इन नए संशोधनों के तहत उम्मीदवारों की जमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) में भारी वृद्धि की गई है, साथ ही चुनावी खर्च के हिसाब-किताब और नामांकन दाखिल करने की प्रक्रियाओं को पहले से अधिक पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है।
जमानत राशि में 60 फीसदी तक बढ़ोतरी
नए संशोधनों के बाद अब चुनाव लड़ना उम्मीदवारों की जेब पर भारी पड़ेगा। महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के लिए जमानत राशि में औसतन 60 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। महापौर पद के लिए जमानत राशि 20,000 से बढ़ाकर 32,000 कर दी गई है। वहीं नगरपालिका अध्यक्ष पद के जमानत राशि 15,000 से बढ़ाकर 24,000 रुपए तय की गई है।
अलग बैंक खाता अनिवार्य
चुनावी खर्चों में पारदर्शिता लाने के लिए शासन ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और वार्ड पार्षदों के प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए एक पृथक व स्वतंत्र बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। चुनाव प्रचार से जुड़ी हर प्रकार की प्राप्ति (फंडिंग/चंदा) और खर्च का पूरा रिकॉर्ड इसी खाते से संचालित किया जाएगा। नामांकन जमा करते समय ही रिटर्निंग आॅफिसर को इस नए बैंक खाते की संपूर्ण जानकारी सौंपनी होगी।
खर्च का लेखा-जोखा न देने पर अयोग्यता
उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना (रिजल्ट) के दिन तक किए गए हर छोटे-बड़े खर्च का हिसाब राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। उम्मीदवारों को सभी रसीदें, बिल और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे। तय समय-सीमा के भीतर व्यय का ब्योरा न सौंपने की स्थिति में राज्य निर्वाचन आयोग प्रत्याशी को अयोग्य घोषित कर सकता है और एक निश्चित अवधि के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा सकता है।
नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा और नियम
अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 7वां दिन होगी। यदि 7वां दिन किसी सार्वजनिक अवकाश का पड़ता है, तो उससे अगला कार्यदिवस अंतिम तिथि माना जाएगा। एक ही पद के लिए यदि कोई प्रत्याशी एक से अधिक नामांकन पत्र जमा करता है, तो निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन स्वीकार नहीं करेंगे।
राइट टू रिकॉल और पद रिक्तता की प्रक्रिया
संशोधित नियमावली में जनप्रतिनिधियों को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 एवं मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार आयोग द्वारा तय प्रक्रिया के तहत महापौर या अध्यक्ष को पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकेगी। यदि किसी स्थिति (निधन, इस्तीफा या निर्वाचन रद्द होने) में पद रिक्त होता है, तो इसकी लिखित सूचना तुरंत जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रस्तुत करनी होगी।
धन के गलत इस्तेमाल पर लगेगी लगाम
सरकार के इन सख्त संशोधनों का सीधा प्रभाव आगामी चुनावों पर पड़ेगा। जमानत राशि बढ़ने से जहां गैर-गंभीर प्रत्याशियों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है। वहीं अलग बैंक खाते और व्यय ब्योरे के नियम से चुनाव में काले धन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

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