धर्मनगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ यानी सिंहस्थ 2028 की तैयारियां बड़े पैमाने पर शुरू हो चुकी हैं। इस महाआयोजन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए शहर में चौड़ीकरण और विकास का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में विकास की मिसाल
मुख्यमंत्री ने कहा-विकास के लिए कड़े फैसले जरूरी
यह मकान मेरे जीवन के अनगिनत मोड़ों का साक्षी रहा

उज्जैन। स्टार समाचार वेब
धर्मनगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ यानी सिंहस्थ 2028 की तैयारियां बड़े पैमाने पर शुरू हो चुकी हैं। इस महाआयोजन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए शहर में चौड़ीकरण और विकास का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को एक मिसाल की अनोखी तस्वीर सामने आई, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद अपने पैतृक मकान को तोड़ने के लिए कुदाल चलाई। सड़क चौड़ीकरण की जद में आए अपने ही मकान के प्रभावित हिस्से पर कुदाल चलाते हुए सीएम भावुक नजर आए, लेकिन उन्होंने संदेश दिया कि सार्वजनिक हित और शहर के विकास के आगे निजी भावनाएं गौण हैं। मकान पर कुदाल चलाने के बाद भावुक दिखे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा- सिंहस्थ के भव्य और सुगम आयोजन के लिए पूरे उज्जैन में 500 किमी लंबी सड़कों का चौड़ीकरण और कायाकल्प किया जा रहा है। इतने बड़े स्तर पर काम करने के लिए कई बार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं और मन के भावों को भी नियंत्रित करना पड़ता है। अपने घर और उसकी पुरानी यादों से हर किसी का भावनात्मक लगाव होता है। यह मकान मेरे जीवन के अनगिनत मोड़ों और आयोजनों का साक्षी रहा है। लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि उज्जैन के व्यापक हित और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिए जा रहे त्याग में मेरा परिवार भी शामिल है।

पूजा-अर्चना के बाद खुद शुरू कराई कार्रवाई
रविवार को सीएम डॉ. मोहन यादव उज्जैन स्थित अपने पैतृक आवास पहुंचे। मकान का हिस्सा हटाने से पहले उन्होंने घर के भीतर जाकर भगवान की पूजा-अर्चना की और फिर पूरे मकान को ध्यान से देखा। इसके बाद उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से स्वयं कुदाल चलाकर डिमोजीशन की शुरुआत कराई। इस परियोजना में केवल मुख्यमंत्री का ही घर नहीं आ रहा, बल्कि उनकी बड़ी बहन और उज्जैन नगर निगम की सभापति कलावती यादव का आवास भी चौड़ीकरण की सीमा में आ रहा है।
पुरानी यादें और मुआवजा न लेने का फैसला
यह मकान महज एक ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि परिवार की तीन पीढ़ियों की यादों का केंद्र रहा है। इस 12-60 फीट के मकान का निर्माण मुख्यमंत्री के दादा रामचंद्र यादव ने वर्ष 1974 में कराया था। इसी घर में मुख्यमंत्री के पिता पूनमचंद्र यादव और उनके चाचा शंकरलाल यादव सहित पूरे परिवार का बचपन बीता। यह मकान दो भागों में विभाजित है। एक हिस्सा सीएम के पिता पूनमचंद्र यादव और दूसरा हिस्सा उनके चचेरे भाई गोविंद यादव के नाम है। सड़क चौड़ीकरण में मुख्यमंत्री के हिस्से का लगभग 2.9 मीटर और उनके भाई के हिस्से का 3 मीटर भाग आ रहा है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने न केवल विकास कार्य के लिए मकान के प्रभावित हिस्से को हटाने पर सहर्ष सहमति जताई, बल्कि इसके बदले सरकार से कोई भी मुआवजा नहीं लेने का अनुकरणीय निर्णय भी लिया।
उज्जैन शहर में जारी है चौड़ीकरण की मुहिम
सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत अवैध या बाधित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई का रविवार को दूसरा दिन था। इससे पहले शनिवार को प्रशासन द्वारा चिह्नित की गई इमारतों पर लाल निशान लगाए गए थे और प्रभावित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन के 12 से अधिक प्रमुख मार्गों पर एक साथ चौड़ीकरण और निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

धर्मनगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ यानी सिंहस्थ 2028 की तैयारियां बड़े पैमाने पर शुरू हो चुकी हैं। इस महाआयोजन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए शहर में चौड़ीकरण और विकास का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।
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