हाल ही की एक समीक्षा बैठक में प्रदेश के मुखिया ने मैदानी अफसरों पर जिस अंदाज में तंज कसा, उसके बाद कई अफसरों की सीटी-पुट्टी गुम बताई जा रही है।

साप्ताहिक कॉलम
मैदानी बाबुओं का ब्लड प्रेशर बढ़ गया

हाल ही की एक समीक्षा बैठक में प्रदेश के मुखिया ने मैदानी अफसरों पर जिस अंदाज में तंज कसा, उसके बाद कई अफसरों की सीटी-पुट्टी गुम बताई जा रही है। गलियारों में चर्चा है कि ब्लड प्रेशर इस बात से बढ़ा हुआ है कि किस किसको फिर से मंत्रालय की राह दिखने वाली है।कहा जा रहा है कि मुखिया की तीखी नजर करीब बारह कलेक्टरों पर टिकी हुई है। कुछ के खिलाफ शिकायतें सीधे ऊपर तक पहुंच चुकी हैं, तो कुछ के कामकाज को खुद मुख्यमंत्री ने अपने दौरों में देख लिया है।सत्ता के अय्यार विंध्य क्षेत्र के भी दो जिलाधीशों की तरफ इशारा कर रहे हैं। इनमें से एक प्रमोटी साहब है, उनके चर्चे मंत्रालय में आम हो चुके हैं।
साथ वाले निपट गए, रिश्तेदार बच गया!

कमाल की बात है। मध्य प्रदेश में सत्ता की कमान बदलते ही पूर्व सत्ताधारी के कई करीबी अफसरों को एक-एक कर किनारे कर दिया गया। इस सफाई अभियान में पूर्वमान्य के एक रिश्तेदार तेज तर्रार अधिकारी भी नप गए। लेकिन इत्तफाक देखिए, पूर्व मुखिया की एक अन्य करीबी रिश्तेदार अब भी उसी मलाईदार विभाग में डेपुटेशन पर जमी हुई हैं।अब गलियारों में सवाल यही घूम रहा हैकि जब साथ वाले सब निपट गए, तो रिश्तेदार कैसे बच गये? खासकर तब, जब यह वही विभाग है जिसे मौजूदा मुखिया का पसंदीदा माना जाता है। इसलिए लोग बस यही कयास लगा रहे हैं कि इन पर गाज कब गिरती है या फिर यह मेहरबानी यूं ही जारी रहेगी।
स्वास्थ्य महकमे की सेहत भी गजब है

स्वास्थ्य विभाग की हालत भी कम दिलचस्प नहीं बताई जा रही। चर्चा है कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के कुछ खास लोग आज भी कमाऊ संस्थानों के मुखिया बने आराम से कुर्सी पर पसरे हैं। मजेदार बात यह है कि ऐसे एक महोदय के पास जो डिग्री है, उसके मुताबिक उन्होंने कभी पेशा ही नहीं किया। असल पहचान तो होटल व्यवसाय की रही, लेकिन मंत्री जी की कृपा ऐसी रही कि थोड़ा गुणा-भाग हुआ और सीधे संस्थान के प्रमुख बन बैठे।कहते हैं इन संस्थानों की आमदनी अच्छी-खासी है, इसलिए गलियारों में फुसफुसाहट यह भी है कि अगर निष्ठा ने पाला नहीं बदला होगा तो हिस्सेदारी की दिशा भी शायद वही पुरानी होगी। वैसे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाल रहे मौजूदा नेताजी की नजर अब तक इन पर क्यों नहीं पड़ी। यह सचमुच हैरानी है, या फिर किसी ने बताया ही नहीं या फिर कहानी परदा उठने से पहले ही समझ ली गई है।

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हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से
जिस समाज में भगवान के घर में चोरी करने वाला हाथ नहीं कांपता, वहां चिंता चोरी की राशि से अधिक उस संस्कार की होनी चाहिए, जिसकी मृत्यु चुपचाप हमारे सामने हो रही है।
जी हाँ, मेरी प्राथमिकता है कि योग बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बने। मुझे खुशी है कि एनसीईआरटी ने इसे स्वीकार किया है।
हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से
सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई लोग होते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कोर टीम कितनी मजबूत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शुरुआती दौर में एक चौंकाने वाला चेहरा ‘सरप्राइज चॉइस’ के रूप में देखा गया, लेकिन बीते ढाई सालों में उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि भाजपा संगठन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है।
जिस तरह से सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में फैसले लिए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि भाजपा पुराने स्थापित राजनीतिक घरानों से हटकर नए और युवा चेहरों को मौका दे रही है। स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
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कांग्रेस के रणनीतिकार यह मानकर चल रहे थे कि विधायकों की बाड़ा बंदी कर संख्या बल उनके पक्ष में है और भाजपा की तीसरी सीट की संभावना समाप्त है, लेकिन राजनीति में आत्मविश्वास और अति-आत्मविश्वास के बीच की दूरी बहुत कम होती है..
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कड़े अनुशासन से तपे और राजनीति में शुचिता, सत्यता और समन्वय को अपना आदर्श मानने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने स्टार समाचार से बातचीत की। अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन के अनुभवों को साझा किया।