सतना में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दो दिनों में संदिग्ध घी का 1.10 लाख रुपये का स्टॉक सीज किया। गोवर्धन और धौलपुर फ्रेश घी के नमूने भोपाल लैब भेजे गए हैं।
सतना जिले में जून माह के आंगनवाड़ी खाद्यान्न का केवल 27 प्रतिशत उठाव दर्ज हुआ। जुलाई के तीन सप्ताह बाद भी 73 प्रतिशत आवंटन लंबित है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना-मैहर में खरीफ सीजन के लिए खाद का पर्याप्त भंडारण होने के सरकारी दावों के बावजूद बिक्री केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें लगी हैं। आंकड़ों में उपलब्धता और वास्तविक वितरण के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
मैहर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया। दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जबकि बंद मिले प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी है।
सतना जिले में जुलाई के 14 दिन बीतने के बाद केवल 33.17 प्रतिशत राशन कार्डधारकों तक खाद्यान्न पहुंचा। जैतवारा सबसे आगे रहा, जबकि चित्रकूट में वितरण महज 3.75 प्रतिशत दर्ज होने से व्यवस्था पर सवाल उठे।
सतना में खाद्य सुरक्षा विभाग ने होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच कर 32 लीटर अनुपयुक्त कुकिंग ऑयल नष्ट कराया। टीपीसी सीमा से अधिक तेल उपयोग करने वालों को सख्त चेतावनी और कार्रवाई के निर्देश दिए।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 का मसौदा जारी किया है। अब अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन का वितरण परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति के आधार पर होगा। 13 जुलाई तक सुझाव आमंत्रित।
संभाग की 77 प्रतिशत उचित मूल्य दुकानों ने 90 प्रतिशत से अधिक राशन वितरण किया है, लेकिन 602 दुकानें लक्ष्य से पीछे हैं। सतना और रीवा में कई दुकानों पर वितरण 30 प्रतिशत से भी कम दर्ज हुआ।
सतना जिले में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। जरूरत के मुकाबले केवल एक-तिहाई खाद उपलब्ध है, जबकि डीएपी का स्टॉक बेहद सीमित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सतना और मैहर की 823 उचित मूल्य दुकानों में से 653 निष्क्रिय पाई गईं। रिपोर्ट वाले दिन केवल 112 दुकानों में ही राशन वितरण दर्ज हुआ, जिससे पीडीएस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं।






















