केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 का मसौदा जारी किया है। अब अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन का वितरण परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति के आधार पर होगा। 13 जुलाई तक सुझाव आमंत्रित।
संभाग की 77 प्रतिशत उचित मूल्य दुकानों ने 90 प्रतिशत से अधिक राशन वितरण किया है, लेकिन 602 दुकानें लक्ष्य से पीछे हैं। सतना और रीवा में कई दुकानों पर वितरण 30 प्रतिशत से भी कम दर्ज हुआ।
सतना जिले में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। जरूरत के मुकाबले केवल एक-तिहाई खाद उपलब्ध है, जबकि डीएपी का स्टॉक बेहद सीमित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सतना और मैहर की 823 उचित मूल्य दुकानों में से 653 निष्क्रिय पाई गईं। रिपोर्ट वाले दिन केवल 112 दुकानों में ही राशन वितरण दर्ज हुआ, जिससे पीडीएस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं।
मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन शुरू हो गया है। 20 देशों के प्रतिनिधि खाद्य सुरक्षा, स्मार्ट फार्मिंग और जलवायु अनुकूल खेती पर मंथन कर रहे हैं।
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर सतना में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच व्यवस्था सवालों में है। कई नमूना रिपोर्ट लंबित हैं, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों सहित ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों पर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं।
सतना जिले में मई 2026 के दौरान पीडीएस वितरण का औसत 93.64 प्रतिशत रहा। करीब 17,715 पात्र राशन कार्डधारक खाद्यान्न नहीं ले सके, जबकि पोर्टेबिलिटी सुविधा से हजारों हितग्राहियों को लाभ मिला।
केंद्र सरकार ने किसानों और राज्यों के विरोध के बाद गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 के मसौदे को वापस ले लिया है। खांडसारी और एथनॉल नियमों की समीक्षा अब नए सिरे से होगी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
मैहर जिले की महेदर उचित मूल्य दुकान में पीओएस रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला। जांच में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न गायब पाए जाने पर प्रशासन ने विक्रेता पर 9.80 लाख रुपए की वसूली के आदेश जारी किए।
सतना जिले की राशन दुकानों की आधिकारिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। 536 दुकानों में केवल 141 दुकानें ही नियमित एक्टिव रहीं। कई क्षेत्रों में पीओएस मशीनें बंद रहने से गरीब हितग्राहियों को राशन मिलने में भारी परेशानी हुई।






















