सतना जिला अस्पताल में 62 जरूरी दवाओं की कमी, मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने की मजबूरी, व्यवस्था पर सवाल।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी और संजय गांधी अस्पताल में करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें समय से पहले खराब हो गईं। सीटी स्कैन की प्रेशर इंजेक्टर मशीन चार महीने से बंद है, वहीं 13 करोड़ की एमआरआई मशीन का एसी सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है, जिससे मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है।
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स पैथोलॉजी जांच करने वाली कंपनियों पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बिना जांच के ही रिपोर्ट बनाई गई और ₹943 करोड़ का भुगतान किया गया। कांग्रेस ने मामले की CBI जांच की मांग की है।
सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। डॉक्टरों के 60% और स्वास्थ्यकर्मियों के 30% पद खाली हैं। नियमित डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में नदारद रहकर प्राइवेट प्रैक्टिस में लगे हैं, जबकि संविदा डॉक्टरों के भरोसे मरीजों की जान बच रही है।
उमरिया जिले के पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक माह से टिटनेस का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। गंभीर चोट या घाव के बाद मरीजों को इलाज से वंचित कर बाहर मेडिकल दुकानों से दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बीएमओ का लापरवाह बयान स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर करता है। ग्रामीणों ने सरकार और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और तुरंत दवा उपलब्ध कराने की मांग की।
सतना जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सरदार वल्लभभाई पटेल में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सायंकालीन ओपीडी में डॉक्टरों की गैरहाज़िरी और मरीजों की तड़पती लाइनें जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। पढ़ें इस ग्राउंड रिपोर्ट में डॉक्टरों की लापरवाही और सिस्टम की चुप्पी की पूरी सच्चाई।
इस रिपोर्ट में जानिए कैसे सरकारी अस्पतालों में मरीजों से चंदा वसूला जा रहा है, निजी अस्पतालों को विभागीय बाबुओं का संरक्षण मिला है और स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें फैल चुकी हैं। पढ़ें ब्रजेश पाण्डेय की खास रिपोर्ट जो उठाती है स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई की परतें।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल से तीन डॉक्टरों के इस्तीफे ने स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ा झटका दिया है। यूरोलॉजी विभाग के डॉ विवेक शर्मा और डॉ विजय शुक्ला ने नोटिस देकर अस्पताल छोड़ने का निर्णय लिया है। वहीं संजय गांधी अस्पताल की एक गायनेकोलॉजिस्ट ने भी नौकरी छोड़ निजी अस्पताल शुरू कर दिया है। डॉक्टरों की कमी से मरीजों की परेशानी और बढ़ने की आशंका।
शहडोल के बिरसा मुंडा शासकीय मेडिकल कॉलेज में करोड़ों की लागत से बनी बिल्डिंग और मशीनें हैं, लेकिन डॉक्टर, टेक्नीशियन और स्टाफ की भारी कमी है। एमआरआई, सीटी स्कैन और ब्लड बैंक जैसी सुविधाएं कागज़ों में हैं, लेकिन मरीजों को बाहर भटकना पड़ रहा है। 6 साल में भी व्यवस्था नहीं सुधरी, नौकरशाही की उदासीनता ने लोगों की जान जोखिम में डाल दी है।
सतना जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने पहली बार कंधे के लिगामेंट का सफल ऑपरेशन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। मरीज सत्यम सिंह को एक साल पुराने फ्रैक्चर से राहत मिली। आठ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर यह जटिल सर्जरी पूरी की, जिससे अब मरीज पूरी तरह आराम में है। निजी अस्पतालों की तुलना में यह इलाज सरकारी अस्पताल में निःशुल्क उपलब्ध हुआ।






















