मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी से राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है, जिनमें से 11 जिलों में तो 80 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है।

मध्य प्रदेश के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात
30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं
11 जिले ऐसे हैं, जहां 80% से कम पानी गिरा

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी से राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है, जिनमें से 11 जिलों में तो 80 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है। इस अनियमित बारिश का सीधा असर फसलों, पेयजल आपूर्ति, जल विद्युत उत्पादन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य बारिश का औसत 37.3 इंच है, जबकि इस बार केवल 35.6 इंच (95.4 फीसदी) बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम है।
5 साल में सबसे सूखा मानसून
वर्ष 2022 में सर्वाधिक 46 इंच बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच पानी गिरा था। इस बार 35.6 इंच के साथ यह बीते 5 वर्षों की सबसे कम बारिश है। मात्र 0.6 फीसदी की कमी के कारण मध्य प्रदेश सामान्य से कम बारिश वाली श्रेणी में चला गया है।
पश्चिम में कम, पूर्व में ज्यादा बारिश
मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से (इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल संभाग) में सामान्य से 12 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि पूर्वी हिस्से (जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल संभाग) में 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
जून का घाटा नहीं भर पाए जुलाई-सितंबर
मानसून ने इस बार 9 दिन की देरी से 24 जून को दस्तक दी थी। जून के महीने में बारिश में 30 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से अधिक बारिश हुई, लेकिन यह शुरुआती घाटे की भरपाई नहीं कर सकी।
सोयाबीन और गेहूं का उत्पादन घटेगा
मालवा सहित इंदौर और नर्मदापुरम में कम बारिश से सोयाबीन उत्पादन प्रभावित होगा। इस साल प्रदेश में 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन और कुल 134.31 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि पश्चिमी हिस्से में पानी की कमी से सोयाबीन का उत्पादन 2 से 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक घट सकता है। वहीं पानी की कमी के कारण आगामी रबी सीजन में गेहूं और चने की बोवनी भी प्रभावित होगी।
19 प्रमुख बांध रीते, पेयजल और बिजली पर खतरा
प्रदेश के कुल 54 बड़े बांधों में से 35 बांध 90 फीसदी या उससे अधिक भरे हैं। वहीं 19 बांधों में पानी का स्तर 10 से 90 प्रतिशत के बीच अटका हुआ है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने 90 फीसदी से अधिक भरे बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। वहीं गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और मणिखेड़ा जैसे 5 बड़े जल विद्युत गृहों में जलस्तर कम रहने से हाइड्रो पावर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
शहरों में जल संकट की आशंका
भोपाल: सामान्य से 9 फीसदी अधिक (41 इंच से ज्यादा) बारिश दर्ज की गई। बड़ा तालाब, भदभदा और कलियासोत डैम फुल हो चुके हैं, हालांकि केरवा और कोलार में पानी की कमी है।
इंदौर: सामान्य से 27 प्रतिशत कम (लगभग 9.5 इंच कम) बारिश हुई है। शहर की जल आपूर्ति मुख्य रूप से नर्मदा, यशवंत सागर और बिलावली तालाब पर निर्भर है।
उज्जैन: गंभीर डैम इस मानसूनी सीजन में पूरा नहीं भर सका, जिससे शहर में पेयजल समस्या गहरा सकती है।

मध्यप्रदेश के मैहर जिले में आज तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में दमोह के दो लोगों की मौत हो गई। ग्राम पोड़ी के पास सुबह करीब चार बजे गया जी से लौट रही कार हादसे का शिकार हो गई। हादसे में कार सवार डॉक्टर संजय गंगेले और उनके भाई प्राचार्य सुधीर गंगेले की मौत हो गई।
मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी से राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है, जिनमें से 11 जिलों में तो 80 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है।
मध्यप्रदेश के धार जिले के बदनावर में लेबड़-नयागांव फोरलेन पर बड़ी चौपाटी से कुछ दूरी पर पिटगारा तिराहे पर शनिवार सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्राला ने बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार पति-पत्नी और उनकी 14 वर्षीय बेटी की मौके पर ही मौत हो गई।
भोपाल के गांधी भवन में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने महात्मा गांधी के विचारों को जीवन में उतारने और नशा-मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया।
मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों की बैठक में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
रीवा एसडीएम कार्यालय में पट्टा फाइल के आदेश में पांच साल की देरी से नाराज अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कपड़े उतारकर धरना दिया। साथियों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।
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