सतना कृषि उपज मंडी में पन्ना के किसान ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति उसकी तिल बेच दी गई। भुगतान मांगने पर धमकियां मिलीं। शिकायत के बाद मंडी सचिव ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
कृषि उपज मंडी में सामने आए एक मामले ने किसानों की सुरक्षा, उनकी उपज की जवाबदेही और मंडी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पन्ना जिले के एक किसान ने आरोप लगाया है कि मंडी में सुरक्षित रखने के लिए छोड़ी गई उसकी तिल को एक तुलावटी ने बिना उसकी अनुमति बेच दिया। इतना ही नहीं, जब उसने अपनी मेहनत की कमाई मांगी और शिकायत करने की कोशिश की तो उसे कथित रूप से जान से मारने, मंडी में नहीं घुसने देने और लुटवाने तक की धमकी दी गई। मामले की शिकायत मंडी सचिव से की गई है, जिस पर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायतकर्ता सुशील जैन, निवासी ग्राम सगरा, तहसील पवई (जिला पन्ना), ने अपने आवेदन में बताया है कि वह कुछ समय पहले दो बोरी तीली बेचने के लिए सतना कृषि उपज मंडी आए थे। बाजार में उचित भाव नहीं मिलने पर उन्होंने फसल नहीं बेची। आरोप है कि मंडी के कांटा धारक रज्जन ने उन्हें भरोसा दिलाया कि फसल उसके कांटे पर सुरक्षित रहेगी। इस भरोसे पर किसान अपनी दोनों बोरियां वहीं छोड़कर घर लौट गया।
किसान का आरोप है कि अगले ही दिन उसकी जानकारी और अनुमति के बिना दोनों बोरियों की तीली बेच दी गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिक्री के दौरान दूसरे तुलावटी सुंदर भी मौजूद थे। जब किसान दोबारा मंडी पहुंचा और अपनी फसल के बारे में पूछा, तब आरोपी ने कथित रूप से फसल बेचने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि परिवार में किसी की तबीयत खराब होने के कारण उसने वह रकम खर्च कर दी है और एक सप्ताह के भीतर पूरा भुगतान कर देगा।
एक सप्ताह का वादा, वर्षों तक नहीं मिला भुगतान
पीड़ित किसान के अनुसार यह भरोसा भी झूठा साबित हुआ। आवेदन में कहा गया है कि लगभग एक क्विंटल तीली की बिक्री का भुगतान आज तक नहीं मिला। शुरूआत में एक सप्ताह का समय मांगने वाला आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। किसान कई बार मंडी पहुंचा, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला। आरोप है कि वर्षों बाद भी उसकी मेहनत की कमाई वापस नहीं मिली।
शिकायत करने पर मिली धमकियां
मामले का सबसे गंभीर पक्ष वह है जिसका उल्लेख किसान ने अपने शिकायती पत्र में किया है। किसान का आरोप है कि जब उसने मंडी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की बात कही तो आरोपी गाली-गलौज पर उतर आया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार आरोपी ने कहा कि यदि मंडी में शिकायत की गई तो उसका मंडी आना मुश्किल कर दिया जाएगा, उसे गल्ला नहीं बेचने दिया जाएगा और सतना में कहीं भी लुटवा दिया जाएगा या उससे पैसे छिनवा लिए जाएंगे। किसान ने क्षेत्रवाद का हवाला देकर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। इन्हीं धमकियों के कारण वह लंबे समय तक शिकायत दर्ज कराने का साहस नहीं जुटा सका।
सवालों के कटघरे में मंडी प्रशासन
यह मामला केवल एक किसान की शिकायत तक सीमित नहीं है बल्कि मंडी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि मंडी परिसर में रखी किसान की उपज बिना उसकी अनुमति बेची जा सकती है तो किसानों की उपज की सुरक्षा और जवाबदेही किसके पास है? यदि शिकायत करने वाले किसान को ही धमकियों का सामना करना पड़े, तो ऐसी स्थिति में अन्य किसान अपनी शिकायतें किस भरोसे दर्ज कराएंगे? यह घटना मंडी प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है।
सचिव से कार्रवाई और सुरक्षा की मांग
पीड़ित किसान ने कृषि उपज मंडी समिति, सतना के सचिव को लिखित शिकायत देकर अपनी एक क्विंटल तीली की पूरी राशि वापस दिलाने, आरोपी तुलावटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। मंडी सचिव कार्यालय ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक आरोपी तुलावटी रज्जन का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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