पत्रकार रमाशंकर मिश्रा के ब्लॉग में विंध्य की राजनीति, नौकरशाही की चालबाजियाँ और प्रशासनिक अनियमितताओं पर तीखी टिप्पणी। जानिए कैसे ‘भइयाजी’ विरोधियों को पछाड़ते हुए सत्ता की ऊंचाइयों पर पहुंचे।

देवी मां की कृपा या विधि की विडम्बना
एक दौर था जब विंध्य के ‘विकास पुरुष’ को घेरने के लिए विंध्य के अलावा प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं के घर मीटिंग हुआ करती थी। आज स्थिति यह है कि जितने भी विरोधी थे वह चारों खाने चित्त हो गए हैं। इसे ‘विधि की विडम्बना’ कही जाए या ‘देवी मां की कृपा’, आज वही विरोधी जो कल एकजुट होकर ‘भइयाजी’ की कमियां गिनाते थे, आज वही उनके नाम का कसीदा पढ़ना शुरू कर दिए हैं। एक ऐसा भी दौर था जब भइयाजी के चारों तरफ विरोधियों की एक बड़ी फौज थी, विंध्य के कई माननीय एक-दूसरे का हाथ पकड़ सत्ता से संगठन तक विरोध किये। कुछ वर्षों तक वह सफल भी रहे परंतु एक दौर आया जब भइयाजी को सत्ता के एक सिंहासन पर बैठा दिया गया, विरोधियों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। भइयाजी भी ‘काली मां’ के बड़े भक्त वह भी कहां रुकने वाले थे। अगला चुनाव आया और सबको धकेलते हुए वह सत्ता के एक बड़े पद पर आसीन हो गए। पद मिलते ही भइयाजी की नजदीकी पाने विरोधी घुसने लगे परंतु वह भी राजनीति के बड़े खिलाड़ी थे। इनकी चालबाजी से वो वाकिफ अपने रास्ते बिना रुके चलते रहे और विरोधियों को परास्त करते बड़े नेताओं के विश्वासपात्र बन गए।
साहब निकले मझे खिलाड़ी
श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय को अब स्थाई साहब मिल गए हैं। कुर्सी संभालते ही एक बड़ी जिम्मेदारी मिली जो करोड़ों की लागत से बनने वाली कैंसर अस्पताल है, अब साहब की तो बल्ले-बल्ले। प्रभार की बैसाखी से भले ही कॉलेज को छुटकारा मिला हो परंतु साहब को न तो अस्पताल में मरीजों की देखरेख से मतलब है और न ही व्यवस्था से। उनको खुद को सजाने संवारने में फुर्सत नहीं है। हादसे भी होते हैं एक अवसर ऐसा भी आया जब दवा खरीदी में साहब बुरी तरह से फंस गए। मामला कॉलेज के बाहर आया, भद पिटने लगी तब साहब ने इसका ठीकरा कहीं और फोड़ना चाहा। आनन-फानन में रातोंरात फाइल तैयार की गई और साहब को डूबने से बचा लिया, बचते भी क्यों न वह एक मझे खिलाड़ी की तरह पांसा फेंकने में माहिर जो निकले। हालांकि अब वह फूंक-फूंककर कदम रखने लगे हैं।
अब इन्हें सपने में दिखने लगी हवालात
विकास के सिस्टम में दीमक की तरह बैठे एक विभाग के ‘बड़के साहब’ को अब सपने में हवालात दिखने लगी है। वह इसलिए कि तीन वर्ष पूर्व करोड़ों रुपए की लागत से एक टेंडर हुआ। जिसमें अस्पताल के रेनोवेशन का काम किया जाना था। ठेकेदार भी बनाए गए जो अधिकारी के बड़े नजदीकी थे। निर्माण कार्य में लगने वाला पैसा भी जेब में चला जाए और किसी को कानोंकान खबर न हो इसलिए जिले के बाहर की निर्माण एजेंसी चुनी गई। बगैर कार्य के करोड़ों रुपए डकार लिए गए, ऐसे ठेकेदार एवं अधिकारी और भी थे जिन्हें संबंधित कार्य कराने की ललक थी। जब भुगतान हो गया और काम भी नहीं हुआ तो शिकायत हुई। शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो तक पहुंची, एफआईआर तक दर्ज हो गया। विवेचना शुरू हुई तब साहब को ऐसा लगा मानों वह बुरी तरह फंस गए हैं। ईओडब्ल्यू को जो बयान दिया गया वह गोल मोल था। ऐसे में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने पूरा प्रतिवेदन ही मांग लिया। ‘बड़के साहब’ के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। न्यायालय की चौकठ भी चढ़ने लगे, अब उन्हें सपने में हवालात के दरवाजे दिखाई देने लगे हैं।
रस्सी जल गई, नहीं गई ऐंठन
जिला संगठन में बड़ा पद मिलते ही ‘नेताजी’ की बांछें खिल उठी। कार्यालय मानों उनका अपना घर हो गया। अपने मन से संगठन के पदाधिकारी ‘नेताजी’ ने ही मनोनीत किए, एक लम्बी पारी भी खेली। जिले में प्रभारी मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक के कार्यक्रम में ‘नेताजी’ पहले पायदान में बैठते। बड़े अधिकारी से लेकर छोटे अधिकारी भी उनकी बड़ी आवभगत करते। अब वह अपने आपको जिले के बड़े नेताओं में गिनने लगे। सांसद, विधायक भी अब उनके नीचे हो गए। मुख्यमंत्री, मंत्री का दौरा कहां कराना है यह खुद नेताजी तय करते हैं। लम्बी पारी खेलने के बाद जब संगठन के दोबारा चुनाव की बारी आई और उन्हें रिपीट नहीं किया गया तब उन्होंने कार्यालय तक आना बंद कर दिया। अब वह प्रदेश के बड़े नेताओं द्वारा किए जाने वाले दौरों के वक्त जरूर देखे जाते हैं। यह अलग बात है कि जिस कुर्सी पर वह विराजमान होते थे वहां अब कोई दूसरे नेताजी बैठने लगे हैं। हालांकि अभी भी अपने रुतबे को वह बरकरार रखना चाहते हैं।
पत्रकार करण उपाध्याय के कॉलम प्लेटफ़ॉर्म में सतना रेलवे विभाग के गलियारों में घूम रही दिलचस्प कहानियां – किसी अधिकारी की मलाईखोरी के किस्से, किसी की ईमानदारी की दुहाई, विकास की धीमी चाल और खुरचन की मिठास तक। प्लेटफॉर्म पर सुनाई दे रही ये चर्चाएं यात्री से लेकर अफसर तक सबको गुदगुदा रही हैं।
प्रो. रवीन्द्रनाथ तिवारी अपने लेख में कहते हैं कि भारत की 79 वर्षों की स्वाधीनता यात्रा अब वास्तविक स्वतंत्रता की ओर अग्रसर है। वे बताते हैं कि राजनीतिक आज़ादी पर्याप्त नहीं, बल्कि शिक्षा, न्याय, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में ‘स्व’ के तंत्र की स्थापना ही असली राष्ट्रनिर्माण है। अमृतकाल का संकल्प भारत को विश्वगुरु पद पर प्रतिष्ठित करने का है।
जयराम शुक्ल अपने लेख में बताते हैं कि असली राष्ट्रप्रेम तिरंगा रैली निकालने या दिखावे से नहीं, बल्कि अपने-अपने दायित्व को ईमानदारी और निष्ठा से निभाने में है। शहीद पद्मधर सिंह से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक के बलिदान का स्मरण करते हुए वे कहते हैं कि तिरंगा आचरण में दिखना चाहिए, आवरण में नहीं।
इस रिपोर्ट में जानिए कैसे सरकारी अस्पतालों में मरीजों से चंदा वसूला जा रहा है, निजी अस्पतालों को विभागीय बाबुओं का संरक्षण मिला है और स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें फैल चुकी हैं। पढ़ें ब्रजेश पाण्डेय की खास रिपोर्ट जो उठाती है स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई की परतें।
रीवा की राजनीति में एक बार फिर श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं। वहीं बीजेपी में आंतरिक असंतोष, कांग्रेस को बैठे-बिठाए मिला मुद्दा, और निगम-मंडल की कुर्सियों के लिए शुरू हुआ जोड़-जुगाड़, इन सबने विंध्य की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है। पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर मिश्रा का ब्लॉग पॉवर गैलेरी।
पत्रकार धीरेंद्र सिंह राठौर के ब्लॉग पावर गैलरी में पढ़िए — कैसे एक नेता जी दो चुनाव हारने के बाद बिजली के मीटरों की चिंगारी से फिर राजनीति में कूद पड़े हैं। साथ ही जानिए कि कैसे सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर के बाद भी अधर में लटके हैं, अफसरशाही ने जनप्रतिनिधियों को बेबस कर दिया है और सरपंच साहब ने पंचायत भवन को दुकान में बदल डाला है।
सतना संभाग में बिजली विभाग की ‘कुर्सी’ को लेकर मची होड़, नए अफसर के आने से विभाग में लगा ‘करंट’। स्मार्ट मीटर से लेकर वसूली तक की नई योजनाएं, और गर्मी में सोए अधिकारी अब बारिश में ‘चार्ज’ होकर आम जनता पर टूटे। पढ़ें बृजेश पाण्डेय की तीखी और चुटीली रिपोर्ट।
रीवा में आयोजित पर्यटन कान्क्लेव ने विंध्य क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चित्रकूट, मुकुंदपुर, संजय दुबरी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की पहल न केवल क्षेत्रीय विकास, बल्कि रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को भी गति देगी।
सतना के जिला अस्पताल में ब्लड बैंक ‘राम’ भरोसे चल रहा है। दलालों की पौ-बारह है और मरीजों की जान आफत में। अधिकारी मौन, जांच सिर्फ चाय तक सीमित। इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक की करतूतों पर ‘बड़े साहब’ का रौद्र रूप देखने को मिला, लेकिन कार्रवाई नदारद। पढ़िए पत्रकार बृजेश पांडे का ब्लॉग।
पुलिस विभाग की अंदरूनी राजनीति, संबंधों का असंतुलन, पसंद-नापसंद से उपजी तकरार, और अफसरों की संवादहीनता की हकीकत को बारीकी से उजागर करता अमित सेंगर का व्यंग्यात्मक विश्लेषण। थानों से लेकर अफसरों की केबिन तक फैली चुप्पियों और शिकायतों का दिलचस्प दस्तावेज़।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह