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एमपी हाईकोर्ट: शादीशुदा बेटी भी अनुग्रह और अवकाश नकदीकरण की हकदार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि मृत कर्मचारी की शादीशुदा बेटी ही उसकी एकमात्र कानूनी वारिस है, तो वह अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण की हकदार होगी।

By: Arvind Mishra

Feb 25, 202612:37 PM

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एमपी हाईकोर्ट: शादीशुदा बेटी भी अनुग्रह और अवकाश नकदीकरण की हकदार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ।

  • मृत कर्मचारी की शादीशुदा बेटी ही एकमात्र कानूनी वारिस
  • अदालत ने दो महीने के भीतर भुगतान करने के दिए निर्देश

जबलपुर। स्टार समाचार वेब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि मृत कर्मचारी की शादीशुदा बेटी ही उसकी एकमात्र कानूनी वारिस है, तो वह अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण की हकदार होगी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित राशि का भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए। दरअसल, नरसिंहपुर निवासी प्रसन्ना नामदेव ने पिता प्रभात कुमार नामदेव की मृत्यु के बाद अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण का भुगतान न किए जाने को चुनौती दी थी। प्रभात कुमार जिला न्यायालय नरसिंहपुर में ड्राइवर के पद पर पदस्थ थे और 4 मई 2024 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था।

सर्विस रिकॉर्ड में बेटी ही नॉमिनी

याचिका में बताया गया कि प्रसन्ना नामदेव अपने पिता की एकमात्र जीवित कानूनी वारिस हैं और उन्हें सर्विस रिकॉर्ड में नामांकित (नॉमिनी) भी किया गया था। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति और अन्य सेवा लाभों के भुगतान के लिए आवेदन किया। अन्य सभी भुगतान नॉमिनी मानते हुए कर दिए गए, लेकिन अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण का भुगतान इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि वह शादीशुदा हैं। याचिकाकर्ता ने इसे प्राकृतिक न्याय और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।

इसलिए उनका आवेदन निरस्त किया गया

अनावेदक पक्ष की ओर से राज्य सरकार के एक नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि अनुग्रह और अवकाश नकदीकरण का भुगतान मृतक कर्मचारी के पति या पत्नी को किया जाएगा। एक से अधिक पत्नी होने की स्थिति में राशि बराबर बांटी जाएगी। इसके अलावा मृतक कर्मचारी का सबसे बड़ा बेटा या सबसे बड़ी अविवाहित बेटी ही उक्त राशि की हकदार होगी। चूंकि याचिकाकर्ता शादीशुदा हैं, इसलिए उनका आवेदन निरस्त किया गया।

वारिसों को मिलनी चाहिए, चाहे शादीशुदा हो या नहीं

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित नोटिफिकेशन में यह उल्लेख नहीं है कि यदि शादीशुदा बेटी के अलावा कोई अन्य वारिस न हो, तो अनुग्रह राशि किसे दी जाएगी। इसका अर्थ यह है कि यदि शादीशुदा बेटी ही मृतक की एकमात्र कानूनी वारिस है, तो उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद अनुग्रह राशि अंतिम संस्कार के लिए तत्काल दी जाती है। इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि शादीशुदा बेटी इसका दावा नहीं कर सकती। मृतक कर्मचारी की अनुग्रह तथा अवकाश नकदीकरण राशि उसके कानूनी वारिसों को दी जानी चाहिए, चाहे वे शादीशुदा हों या नहीं।

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