मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब सीएम डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:30 बजे मंदिर पहुंचे और मां वाग्देवी (सरस्वती) के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। पद पर रहते हुए भोजशाला पहुंचने वाले डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं।

भोजशाला पहुंचे सीएम, भगवामय शहर, भक्तों में उत्साह
इंदौर हाई कोर्ट फैसले बाद सरकार का ऐतिहासिक दौरा
श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया

धार। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब सीएम डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:30 बजे मंदिर पहुंचे और मां वाग्देवी (सरस्वती) के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। पद पर रहते हुए भोजशाला पहुंचने वाले डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर धार शहर में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। शहर के विभिन्न हिस्सों में स्वागत मंच बनाए गए थे और बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए सड़कों पर पहुंचे। भीषण गर्मी के बावजूद हजारों श्रद्धालुओं और समर्थकों ने जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया।

मां सरस्वती की आराधना
भोजशाला परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाया गया और पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद डॉ. मोहन यादव ने मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना की और श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री हवन कुंड तक पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुति दी। जय मां सरस्वती के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा महत्व
दरअसल, मुख्यमंत्री का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 15 मई को इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने हिंदू पक्ष को वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री का भोजशाला पहुंचना राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इसे राज्य सरकार की गंभीरता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सरस्वती लोक निर्माण और धार्मिक-सांस्कृतिक कॉरिडोर को लेकर भी चर्चाएं तेज रहीं। श्रद्धालुओं और स्थानीय संगठनों का मानना है कि यदि राज्य सरकार गंभीर पहल करती है तो केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री स्तर पर भी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापसी का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। पूरे धार शहर में उत्सवी माहौल दिखाई दिया और लोगों में इसे लेकर खास उत्साह नजर आया। मुख्यमंत्री के इस दौरे को भोजशाला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में भोजशाला
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद भोजशाला से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए हैं। श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों को उम्मीद है कि सरकार भविष्य में भोजशाला को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। विशेष रूप से लंदन में संरक्षित मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग फिर तेज हो गई है। लोगों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस दिशा में विशेष पहल की घोषणा करेंगे।
धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर बनाने की मांग
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मांडू, धार, अमझेरा और इंदौर को जोड़ते हुए एक धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है। संगठन का कहना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। संगठन ने भोजशाला परिसर में वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय की शीघ्र स्थापना की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इससे भारतीय संस्कृति, वेद और संस्कृत अध्ययन को नया केंद्र मिलेगा।
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मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब सीएम डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:30 बजे मंदिर पहुंचे और मां वाग्देवी (सरस्वती) के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। पद पर रहते हुए भोजशाला पहुंचने वाले डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं।
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