मध्यप्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 उम्मीदवारों को 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग ने यह कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की है।

मचा हड़कंप, नगरीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे
न खर्च का हिसाब दिया न असंतोषजनक जानकारी
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 उम्मीदवारों को 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग ने यह कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की है। ये वे प्रत्याशी हैं, जो चुनाव खर्च का ब्यौरा पेश नहीं कर पाए। आयोग की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले 3500 अभ्यर्थियों को आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। इसकी वजह यह है कि जिन अभ्यर्थियों को दो साल तक के लिए अयोग्य किया गया है, वे 2027 के जून-जुलाई में होने वाले चुनाव तक अपनी अयोग्यता की अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए वे चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
अनिवार्यता को दिया दरकिनार
वहीं, जिन्हें पांच साल के लिए अयोग्य किया गया है, वे 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नियम के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पाई-पाई का ब्यौरा देना अनिवार्य होता है।
साक्ष्य भी नहीं कर पाए पेश
आयोग की जांच में सामने आया कि इन 3500 अभ्यर्थियों ने या तो खर्च का हिसाब दिया ही नहीं, या फिर जो जानकारी दी वह अधूरी और असंतोषजनक थी। आयोग ने इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन साक्ष्य पेश नहीं कर पाने के कारण अंतत: उन पर अयोग्यता की मुहर लगा दी गई।
अयोग्यता की अवधि 2 से 5 साल
इस कार्रवाई का सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगा है, जो आगामी उपचुनावों या अगले स्थानीय चुनावों में फिर से दावेदारी की तैयारी कर रहे थे। अयोग्य घोषित होने के बाद अब ये अभ्यर्थी अयोग्यता की अवधि (2 से 5 वर्ष तक) पूरी होने तक किसी भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे।
भोपाल के 82 अभ्यर्थी
5 साल के लिए इन पर लगा प्रतिबंध
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