संचालनालय के अधिकारियों से विवाद के बाद हटाई गईं महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता के कार्य विभाजन और स्थानांतरण आदेश भी शासन ने निरस्त कर दिए। विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र ने इसके आदेश जारी किए हैं।

मीटिंग में बवाल के बाद हटाई गई थीं निधि निवेदिता
विवाद के बाद 14 अफसरों के बदले थे कामकाज
भोपाल। स्टार समाचार वेब
संचालनालय के अधिकारियों से विवाद के बाद हटाई गईं महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता के कार्य विभाजन और स्थानांतरण आदेश भी शासन ने निरस्त कर दिए। विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र ने इसके आदेश जारी किए हैं। आयुक्त का स्थानांतरण पांच सितंबर को हुआ था। चार दिन बाद ही शासन ने उनके आदेश निरस्त कर दिए। निधि निवेदिता ने प्रशासनिक सुविधा का आधार बताते हुए अपर संचालक से लेकर उप संचालक स्तर तक के 14 अधिकारियों के कार्य आवंटन में बदलाव के आदेश तीन सितंबर को जारी किए थे। 14 अगस्त को एक बैठक में निधि निवेदिता का संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव के साथ विवाद हुआ था, जिसके बाद अधिकारी-कर्मचारी एक होकर कार्यालय से बाहर आ गए थे।
मंत्री भूरिया ने कराई थी मध्यस्थता
विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया की मध्यस्थता के बाद कर्मचारियों ने आगे आंदोलन नहीं करने का निर्णय लिया था। तीन सितंबर को जारी कार्य आवंटन आदेश में आयुक्त ने अक्षय श्रीवास्तव को आधार और एमआएएस शाखा की जिम्मेदारी दी थी, जबकि उनके पास पहले पोषण आहार शाखा थी। उप संचालक हरीश खरे को स्थापना, राजपत्रित, गोपनीय शाखा का प्रभार सौंपा गया था। इस पर भी विभाग के कुछ अधिकारियों की आपत्ति थी कि उनके अधीन तीन-तीन उप संचालक कर दिए गए।
निवेदिता के फैसलों पर जताई गई थी आपत्ति
तीन सितंबर को ही निधि निवेदिता ने प्रशासनिक कार्य सुविधा का हवाला देकर राजेश प्रताप सिंह (संयुक्त संचालक, संचालनालय) को जवाहर बाल भवन के संचालक और इस पद पर पहले से पदस्थ उषा सोलंकी को संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग में भेजने के आदेश जारी किए थे। इस पर विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति की थी। उनका कहना था कि जवाहर बाल भवन में संचालक की नियुक्ति शासन करता है, न कि आयुक्त। इस आदेश को भी शासन ने निरस्त कर दिया है। साथ ही सहायक ग्रेड-1 और सहायक ग्रेड-2 के 66 कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद तदनुसार पदस्थापना संबंधी आदेश भी शासन ने रद्द कर दिया है। हालांकि, यह आदेश सात सितंबर को जारी किया गया था।
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