मध्यप्रदेश में अफसरशाही हावी है। जनता तो दूर, जिम्मेदार अफसर कोर्ट के आदेश तक की अनदेखी पर उतारू हैं। लेकिन अब अदालत के आदेश की अनदेखी अफसरों पर भारी पड़ी। कोर्ट ने सजा को तीन सप्ताह के लिए स्थगित रखा है ताकि आदेश का पालन किया जा सके।
By: Arvind Mishra
Mar 25, 202611:33 AM
इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में अफसरशाही हावी है। जनता तो दूर, जिम्मेदार अफसर कोर्ट के आदेश तक की अनदेखी पर उतारू हैं। लेकिन अब अदालत के आदेश की अनदेखी अफसरों पर भारी पड़ी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर के न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने पूर्व एसीएस मोहम्मद सुलेमान, पूर्व में आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं रहे और वर्तमान में आयुक्त आदिम जाति कल्याण तरुण राठी, उज्जैन स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. डीके तिवारी और मंदसौर सीएमएचओ डॉ. गोविंद चौहान को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए दो-दो माह कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सजा को तीन सप्ताह के लिए स्थगित रखा है ताकि आदेश का पालन किया जा सके।
सात पेज में कोर्ट का आदेश
सात पेज के आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये अवमानना याचिकाएं 22 बार सुनवाई के लिए लगीं। हर बार इन याचिकाओं में अधिकारियों को अवसर दिया गया कि वे कोर्ट के आदेश का पालन कर लें, बावजूद इसके पालन नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि छह फरवरी-2026 को आदेश दिया था कि अधिकारी चार सप्ताह में अनिवार्य रूप से आदेश का पालन करें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आंशिक पालन भी पर्याप्त नहीं
अदालत में शासन की ओर से बताया गया कि 12 मार्च 2026 को एक आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं को नियमित करने के संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पहली बात तो यह कि यह चार सप्ताह की समय सीमा में नहीं हुआ है। दूसरी यह कि पूर्व में जारी आदेश केवल कर्मचारियों के नियमितीकरण तक सीमित नहीं था। बल्कि उन्हें अनुषंगी लाभ भी देना जरूरी था। इसलिए शासन के इस तर्क को कोर्ट के आदेश का पूरा पालन नहीं माना जा सकता।
अधिकारी बहाने बनाकर लेते रहे समय
कोर्ट ने यह भी कहा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत उपस्थिति तक के आदेश दिए, बावजूद अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया और बहाने बनाकर समय लेते रहे। अधिकारियों को सजा के लिए जारी आदेश में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऊपरी अदालत में अपील करना, आदेश के पालन से बचने का आधार नहीं हो सकता। विशेषकर तब जब कोई अंतरिम रोक भी न मिली हो, अधिकारियों ने जानबूझकर और लगातार आदेश की अवहेलना की।