
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज यानी बुधवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक हुई।
बड़े विभाग सीएम की अनुशंसा से बना सकेंगे अपनी नीति
गंभीर बीमार पति-पत्नी कर्मचारियों को सरकार दी रियायत
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज यानी बुधवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक हुई। जहां कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है। सीएम और मंत्रियों की सहमति के बाद नीति को अंतिम रूप दिया गया। कैबिनेट फैसलों की जानकारी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने दी। मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में इस साल भी 1 से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे। पिछले साल 1 महीने का समय दिया था। कोई बड़े विभाग अपनी नीति बनाना चाहते हैं तो सीएम की अनुशंसा से अपनी नीति बना सकेंगे। वर्तमान में ए प्लास के सीएम के निर्देश के अनुसार 31 मई तक पूरी करने को कहा है। तबादला नीति में सामान्य रूप से अति गंभीर बीमारी, कैंसर, किडनी, मेडिकल बोर्ड की अनुंशसा पर स्थानंतरित केस शामिल नहीं होंगे। पति-पत्नी की बीमारी अधिकारी-कर्मचारियों के ट्रांसफर को बाहर रखा गया है।
विभागवार तय की गई तबादलों की सीमा
200 अधिकारी-कर्मचारी वाले विभागों में 20 प्रतिशत ट्रांसफर किए जाएंगे।
200 से 800 अधिकारी-कर्मचारी वाले विभागों में 15 प्रतिशत तबादले होंगे।
200 से 1000 अधिकारी-कर्मचारी वाले विभागों में 20 प्रतिशत स्थानांतरण करेंगे।
1000 से 2000 अधिकारी-कर्मचारी वाले विभागों में 10 प्रतिशत ट्रांसफर होंगे।
2000 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी वाले विभागों में 5 प्रतिशत तबादले किए जाएंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग की नीति अलग
स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर वर्ष की तरह अलग रहेगी। जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अलग नीति जारी कर सकते हैं, लेकिन मूल ढांचे से अलग व्यवस्था नहीं कर सकेंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर के माध्यम से किए जाएंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी।
सभी ट्रांसफर आर्डर आनलाइन होंगे
आनलाइन ट्रांसफर आर्डर सभी ट्रांसफर आर्डर आनलाइन सिस्टम के माध्यम से जारी किए जाएंगे। जिन विभागों में आनलाइन सिस्टम नहीं है, वहां आॅफलाइन आवेदन भी तबादलों के लिए लिए जा सकेंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में खाली पद पहले भरे जाएंगे। इसके बाद गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के रिक्त पद भरे जाएंगे। तबादले किसी जिले में तीन वर्ष पूरे करने के बाद ही होंगे, जिसमें वरिष्ठता का ध्यान रखा जाएगा।
बीमार शिक्षकों का नहीं होगा तबादला
कर्मचारी संघ के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार साल तक तबादलों से छूट दी जाएगी। चार साल से अधिक समय तक पद पर रहने पर प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तबादले किए जाएंगे। तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा और विद्यालयों में कार्यरत अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। गंभीर रूप से बीमार या सेवानिवृत्ति के निकट शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।
200 कर्मचारी वाले विभागों में 20 फीसदी तबादला
तबादला नीति में कर्मचारियों के स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर तबादले को लेकर जो व्यवस्था तय की गई है उसके मुताबिक जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं उनमें 20 फीसदी तबादले होंगे। जहां 200 से 1000 तक कर्मचारी हैं वहां 15 प्रतिशत तबादले किए जाएंगे। इसके साथ ही 1000 से 2000 तक की कर्मचारियों की संख्या वाले विभागों में 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक कर्मचारी संख्या वाले विभागों में पांच प्रतिशत तबादले किए जाएंगे।
गृह विभाग के लिए अलग व्यवस्था
गृह विभाग में उप पुलिस अधीक्षक से कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले पुलिस स्थापना बोर्ड और जिले के भीतर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रभारी मंत्री की सहमति से किए जा सकेंगे।
प्रतिबंध अवधि में भी इन मामलों में होंगे ट्रांसफर
सरकार ने कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी तबादलों की अनुमति दी है। न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायतें, अनुशासनात्मक कार्रवाई, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में भी तबादले किए जा सकेंगे। निलंबन, त्यागपत्र या सेवानिवृत्ति से खाली हुए पदों को भरने के लिए भी ट्रांसफर किए जाएंगे।
राजस्व विभाग के लिए विशेष प्रावधान
राजस्व विभाग में जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के अनुभाग परिवर्तन और पदस्थापना प्रभारी मंत्री के परामर्श से की जाएगी।
कैबिनेट बैठक में ई-रिक्शा से पहुंचे दो मंत्री

इधर, कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री गौतम टेटवाल और नारायण सिंह पवार ई-रिक्शा से मंत्रालय पहुंचे। भोपाल के चार इमली में पास-पास रहने वाले दोनों मंत्री एक ही ई-रिक्शा से ढाई किलोमीटर का सफर तय कर मंत्रालय पहुंचे। मंत्रियों के पीछे दूसरे ई-रिक्शा में उनके स्टाफ के लोग पहुंचे, लेकिन जिनके पास पास नहीं थे, उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया। मंत्रियों के बाद उनके स्टाफ के लोग अलग-अलग गाड़ियों से थोड़ी देर के अंतराल पर मंत्रालय पहुंचे।
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