ढोल की थाप और मांदल की गूंज पर सज-धजकर नाचने का दिन आ गया है, क्योंकि मध्यप्रदेश का गौरवशाली उत्सव आ चुका है। अब इसी ऐतिहासिक सांस्कृतिक पर्व भगोरिया की धूम कल यानी (24 फरवरी) मंगलवार से जनजातीय जिले झाबुआ में रहेगी। लगातार सात दिनों तक इस उत्सव के तहत जिले में 35 भगोरिया मेले लगेंगे।
By: Arvind Mishra
Feb 23, 202611:41 AM

झाबुआ। स्टार समाचार वेब
ढोल की थाप और मांदल की गूंज पर सज-धजकर नाचने का दिन आ गया है, क्योंकि मध्यप्रदेश का गौरवशाली उत्सव आ चुका है। अब इसी ऐतिहासिक सांस्कृतिक पर्व भगोरिया की धूम कल यानी (24 फरवरी) मंगलवार से जनजातीय जिले झाबुआ में रहेगी। लगातार सात दिनों तक इस उत्सव के तहत जिले में 35 भगोरिया मेले लगेंगे। इनमें लोक संस्कृति का प्रतिबिंब परिलक्षित होगा। यहां सबसे खास बात यह है कि इस साल भगोरिया उत्सव को अलग ही अंदाज में मनाया जाएगा। जी हां... मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। सीएम ने कहा- मध्यप्रदेश सरकार विकास के प्रति प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में क्षेत्र में और तेजी से विकास कार्य किए जाएंगे। उन्होंने जनजातीय नायक टंट्या मामा के सम्मान में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। साथ ही यह भी जानकारी दी कि अब भगोरिया उत्सव को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है।

खुशियों का उत्सव
गौरतलब है कि जनजातीय क्षेत्र का यह प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव होली के पहले सात दिनों तक मनाया जाता है। दूर दराज महानगरों में रहने वाले आदिवासी श्रमिक भगोरिया उत्सव में शामिल होने के लिए घर लौटते हैं। मेलों में ढोल-मांदल लेकर नाचते-गाते हुए खुशियां मनाते हैं। झूला-चकरी के साथ खाद्यान्न सामग्री की दुकानें सजती हैं।
एक नजर में जान लें इतिहास
भगोरिया आनंद उत्सव है, जो प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। इसे लेकर अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं। पहले इसे गुललिया हाट कहा जाता था, क्योंकि होली के पूर्व के इन हाट बाजारों में गुलाल खेला जाता था। कोई इसे भगोर से जोड़ता है। कोई इसे भगू राजा से जोड़ता है। जनजातीय समाज में वर्षों से होली और दशहरे पर खुशियां मनाई जाती रही हैं। जिसे दोनों फसलों से भी जोड़कर देखा जा सकता है।
कब, कहां लगेंगे भगोरिया मेले